राजस्थान हाईकोर्ट ने हिरासत मौतों के लिए मुआवजा योजना तीन महीने में लागू करने का आदेश दिया
पूरी खबर
राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को हिरासत में मौत के मामलों में मुआवजा देने के लिए 'राजस्थान कस्टोडियल डेथ रिलीफ स्कीम-2025' को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है। अदालत ने योजना को तीन महीने के भीतर लागू करने का आदेश दिया, जिससे जेलों में सुरक्षा और उत्तरदायित्व के प्रश्न उठते हैं। सरकार को अब इस योजना की रूपरेखा तैयार कर, वित्तीय व्यवस्था और कार्यान्वयन तंत्र स्थापित करना होगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद, राज्य प्रशासन को इस दिशा में कदम उठाने की अपेक्षा है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की सराहना की है। अभी तक योजना के विस्तृत प्रावधान और लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे आगे की जाँच और निगरानी आवश्यक होगी।
घटनाक्रम
5 घटनाक्रमन्यूज डेस्क, अमर उजाला ने हाईकोर्ट के आदेश को रिपोर्ट किया और योजना के तीन महीने के भीतर लागू होने की बात दोहराई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुरहाईकोर्ट ने आदेश जारी किया और जेल प्रबंधन को कार्यान्वयन की रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया
हिरासत में मौत की घटनाओं पर पहले भी कई शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिससे अदालत ने हस्तक्षेप किया
जेल प्रबंधन को योजना की विस्तृत शर्तें और पात्रता मानदंड तय करने के लिए निर्देशित किया गया
राजस्थान हाईकोर्ट ने हिरासत में मौत पर राहत योजना के कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी किए
यह पन्ना 28 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:53 बजे की स्थिति है — बाद के अपडेट इसमें शामिल नहीं हैं।
मुख्य तथ्य
- हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हिरासत मौतों के लिए मुआवजा योजना लागू करने का आदेश दिया
- योजना का नाम 'राजस्थान कस्टोडियल डेथ रिलीफ स्कीम-2025' है
- योजना को तीन महीने के भीतर लागू करना है
- हाईकोर्ट का आदेश 27 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ
जवाबदेही के सवाल
उपलब्ध तथ्यों पर आधारित विश्लेषणात्मक सवाल। ये आरोप नहीं, सार्वजनिक जवाबदेही के प्रश्न हैं।
- राज्य सरकार को योजना के विस्तृत प्रावधान कब तक सार्वजनिक करना चाहिए?
- जेल प्रशासन को मुआवजा योजना के कार्यान्वयन में कौन सी निगरानी व्यवस्था स्थापित करनी होगी?
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद वित्तीय संसाधन आवंटन के लिए कौन सा विभाग जिम्मेदार होगा?
आगे क्या
आगे की रिपोर्ट में योजना के ड्राफ्ट दस्तावेज़ और लाभार्थी मानदंडों की जाँच पर नज़र रखनी होगी, साथ ही राज्य सरकार की कार्यान्वयन समयसारिणी की समीक्षा करनी होगी।