राज्य उच्च न्यायालय ने हिरासत में मौत के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया, 48 घंटे में एफआईआर दर्ज करने का आदेश
पूरी खबर
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 21 अगस्त को हिरासत में हुई मौत के मामले में परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया और पुलिस को 48 घंटे के भीतर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस ने हिरासत प्रक्रिया में लापरवाही बरती है, जिससे मृत्युदंड का जोखिम बढ़ा। यह आदेश पुलिस द्वारा पहले दी गई वैधता की दलीलों के विपरीत है, जहाँ उन्होंने कहा था कि सभी गिरफ्तारी प्रक्रिया सही थी। अब यह देखना है कि पुलिस इस आदेश को कब लागू करती है और क्या आगे की जांच में अतिरिक्त दोषी पाए जाते हैं।
घटनाक्रम
2 घटनाक्रमहाई कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के लिए 48 घंटे की समय सीमा निर्धारित की।
परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया।
यह पन्ना 22 अगस्त 2026, सुबह 4:08 बजे की स्थिति है — बाद के अपडेट इसमें शामिल नहीं हैं।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान उच्च न्यायालय ने हिरासत में हुई मौत के लिए परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया।
- अदालत ने पुलिस को 48 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
- पुलिस ने पहले कहा था कि सभी गिरफ्तारियों की प्रक्रिया वैध थी।
- हिरासत में ली गई महिलाओं और पुरुषों को जाँच के लिए थाने में ले जाया गया था।
जवाबदेही के सवाल
उपलब्ध तथ्यों पर आधारित विश्लेषणात्मक सवाल। ये आरोप नहीं, सार्वजनिक जवाबदेही के प्रश्न हैं।
- क्या पुलिस विभाग ने हिरासत में हुई मौत की पूरी जाँच में सभी लापरवाही को उजागर किया है?
- राज्य पुलिस आयुक्तालय को एफआईआर दर्ज करने की समय सीमा का पालन करने के लिए कौन जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
- हिरासत में ली गई महिलाओं और पुरुषों की जाँच के दौरान किन प्रक्रियात्मक त्रुटियों की पहचान हुई?
- हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को किस प्रकार की जवाबदेही रिपोर्ट देनी होगी?
आगे क्या
अगले दो हफ्तों में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की प्रगति और मुआवजा वितरण की स्थिति पर नज़र रखनी होगी।